क्रोध कमजोर की ओर ही उतरता है
क्रोध बुद्धि को खा जाता है और वह बुद्धि का पूर्ण रूप से अपहरण कर लेता है । क्रोध और वासना सबसे पहले प्रहार बुद्धि पर करती है । यह ध्यान देने की बात है कि जैसे पानी ऊपर की ओर नहीं चढ़ता तो ऐसे भी क्रोध भी ऊपर की ओर नहीं चढ़ता । पानी भी नीचे की ओर उतरता है और क्रोध भी नीचे की ओर ही उतरता है । क्रोध कमजोर की ओर ही उतरता है । क्रोध अपने से बड़े की ओर नहीं चढ़ सकता । जिस प्रकार पानी को चढ़ाने के लिए मशीन की आवश्यकता होती है , उसी प्रकार क्रोध को ऊपर चढ़ाने के लिए भी अत्यधिक बाह्य कारण की आवश्यकता पड़ती है ।
क्रोध बुद्धि को खा जाता है और वह बुद्धि का पूर्ण रूप से अपहरण कर लेता है । क्रोध और वासना सबसे पहले प्रहार बुद्धि पर करती है । यह ध्यान देने की बात है कि जैसे पानी ऊपर की ओर नहीं चढ़ता तो ऐसे भी क्रोध भी ऊपर की ओर नहीं चढ़ता । पानी भी नीचे की ओर उतरता है और क्रोध भी नीचे की ओर ही उतरता है । क्रोध कमजोर की ओर ही उतरता है । क्रोध अपने से बड़े की ओर नहीं चढ़ सकता । जिस प्रकार पानी को चढ़ाने के लिए मशीन की आवश्यकता होती है , उसी प्रकार क्रोध को ऊपर चढ़ाने के लिए भी अत्यधिक बाह्य कारण की आवश्यकता पड़ती है ।
क्रोध में व्यक्ति अपने होश खो बैठता है । व्यक्ति का सम्पूर्ण होश चूक जाता है ओर वह बेहोशी का-सा कार्य करने लगता है । क्रोध की अवस्था में व्यक्ति दूसरों के साथ स्वयं अपने को भी भला -बुरा कहने लगता है । क्रोध से युक्त मस्त गीदड़ सिंह पर क्रोध करे तो सिंह पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? निर्बल व्यक्ति यदि बहुत भारी पहलवान पर क्रोध करे तो क्या लाभ होगा ? क्रोध का कारण कुछ भी रहा हो , पर वह साधारण ही होता है ओर इसका प्रमाण यह है कि प्राय: क्रोध करने वाला व्यक्ति क्रोध शांत होने पर पश्चाताप से भरा हुवा या माफ़ी मांगता नजर आता है । अत: व्यर्थ में क्रोध न कर बुद्धि से काम लेना चाहिए ।
मदिरा के एक प्याले से शरीर की जितनी हानि पहुँचती है , उससे कहीं अधिक क्रोध के कारण होती है । किसी भी काम से चरित्र में इतनी कमजोरी नहीं आती , जितनी क्रोध के कारण आती है । क्रोध का पागलपन मानव को अँधा बना देता है । अपेक्षा जब उपेक्षा में बदलती है तो क्रोध आ जाता है । ऐसे समय आवश्यकता है आत्म-संयम ओर आत्म-नियंत्रण की । क्रोध के कारण मानव की शक्तियाँ समाप्त होने लगती हैं । मनुष्य अपनी कार्य-शक्ति और तर्क-शक्ति को खो बैठता है । स्मरण -शक्ति और धैर्य तक क्रोध के कारण लुप्त हो जाते हैं । क्रोध के विषय में कहा गया है _ ' नास्ति क्रोध समं पापं , नास्ति क्रोध समं रिपु: । क्रोधो मूलं अनर्थानाम , तस्मात क्रोधं विवर्जयेत ॥ '






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