रविवार, 15 सितंबर 2013

दमित क्रोध के लिए सारे रास्ते बंद

 दमित क्रोध के लिए सारे रास्ते बंद 


मनोरोग के जितने भी रोगी हैं , उन्होंने अपने क्रोध का भय अथवा प्रलोभन के कारण दमन किया है । क्रोध दो प्रकार का है _ प्रकट क्रोध व दमित क्रोध । प्रकट क्रोध के लिए सारे रास्ते खुले रहते हैं , परन्तु दमित क्रोध के लिए सारे रास्ते बंद रहते हैं । क्योंकि उसे हम दूसरों को अवगत नहीं होने देते और भीतर ही भीतर वह दमित शक्ति पर प्रहार करती रहती है तथा हमारी स्नायविक शक्ति को क्षीण करती जाती है ; अत: आंतरिक अवयवों पर उसका प्रभाव पड़ता ही है ।

जो ग्रन्थियां अपने नियमित स्राव से शरीर की सारी शक्तियों को नियमित रूप से चलाती हैं , वे स्वयं असंतुलित हो जाती हैं । एड्रिनल ग्रन्थि जो ह्रदय की धड़कन को , नाड़ियों में रक्त के प्रवाह को तथा अमाशय में पाचन को नियंत्रित करती है ; वह क्रोध के वेग से असंतुलित होकर तीव्र गति से कार्य करने लगती है । तब ह्रदय की गति का असामान्य रूप से बढ़ना , नाड़ियों में रक्त का दबाव अधिक हो जाना तथा विशेष रूप से मस्तिष्क की शिराओं एवं धमनियों में तीव्र गति से रक्त का प्रवाह का होना । इसके कारण किसी की शिरा या धमनी फट जाने से तत्काल मृत्यु भी हो जाती है ।


पेट में होने वाले अल्सर का कारण भी दबा हुवा क्रोध ही है । क्रोध के कारण अमाशय की पाचन ग्रन्थियां तीव्र उत्तेजना में आकर अत्यधिक अम्ल रस का स्राव करती हैं , जिससे अमाशय की दीवारों पर जमी पालिश उतर जाती है तथा घाव हो जाता है । इस प्रकार क्रोधी व्यक्ति सदैव व्याधियों से पीड़ित रहता है । प्रसिद्ध शरीर विज्ञानी डा जे.एस्टर ने क्रोध के कारण भस्म होने वाली शारीरिक शक्ति का अनुमान लगते हुवे यह घोषित किया है कि पन्द्रह मिनट के क्रोध करने से मानव की साढ़े नौ घंटे के बराबर शक्ति का ह्रास होता है । इस दुष्परिणाम पर विचार किया जाये पता चलता है की इसी क्रोध ने मानव के कितने आत्मिक गुणों का घात किया है ।

क्षण भर के क्रोध करने मात्र से एक हजार छ सौ रक्त के कण जल जाते हैं । जबकि समता भाव से एक क्षण में मात्र एक हजार चार सौ कण ही बन पाते हैं । इससे भी अंदाज लगाया जा सकता है कि क्रोध कितना दुखदायी व नुकसान दायक सिद्ध होता है ।***************


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